जंग हो या इश्क हो, भरपूर होना चाहिए
  इश्क खता हैं, तो ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो।
          क्यूँ करते हो मुझसे इतनी ख़ामोश मोहब्बत,
          लोग समझते हैं इस बदनसीब का कोई नहीं।